विशालाक्षी मंदिर
| विशालाक्षी मंदिर | |
|---|---|
मंदिर के दरवाजा | |
| बेसिक जानकारी | |
| लोकेशन | मीर घाट, बनारस |
| अक्षांस-देशांतर | 25°18′32″N 83°0′39″E / 25.30889°N 83.01083°Eनिर्देशांक: 25°18′32″N 83°0′39″E / 25.30889°N 83.01083°E |
| धर्म/मत | Hinduism |
| देवता | विशालाक्षी |
| District | वाराणसी |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| देस | |
| Architectural description | |
| आर्किटेक्चर प्रकार | मंदिर |
| Creator | नागारादर समुदाय |
| पूरा भइल | 1893 |
विशालाक्षी मंदिर, जेकरा के विशालाक्षी गौरी मंदिर आ विशालाक्षी अम्मन कोविल के नाँव से भी जानल जाला, बनारस के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरन में से हवे। ई मंदिर विशालाक्षी देवी के समर्पित बा, जे पार्वती के एगो रूप मानल जाली। एह मंदिर के 19वीं सदी से नट्टुकोट्टई नगराथर समुदाय द्वारा बनावल आ संरक्षित कइल जात बा। ई समुदाय मूल रूप से तमिलनाडु से जुड़ल एगो व्यापारी समाज हवे।
विशालाक्षी मंदिर के आमतौर पर एगो शक्तिपीठ मानल जाला, जवन हिंदू धर्म में देवी शक्ति के सबसे पवित्र तीर्थस्थानन में गिनल जाला। धार्मिक मान्यता के अनुसार सती के कुंडल (कान के आभूषण) बनारस के एह पवित्र स्थल पर गिरल रहे। एह कारण ई जगह विशेष धार्मिक महत्त्व रखेला।
मंदिर अपना कजली तीज उत्सव खातिर भी प्रसिद्ध बा। ई उत्सव हिंदू पंचांग के भादो महीना (अगस्त–सितंबर) के अन्हार पक्ष के तीज तिथि पर मनावल जाला। बनारस आ उत्तर भारत के कई दूसर मंदिरन के नियर विशालाक्षी मंदिर के निर्माण हवेली नियर डिजाइन में कइल गइल बा। एकरा में दक्षिण भारतीय धार्मिक परंपरा से जुड़ल आर्किटेक्चर आ मूर्तिकला के कई तत्व भी शामिल बाड़ें। उदाहरण खातिर, मंदिर में द्रविड़ आर्किटेक्चर से प्रेरित एगो छोट गोपुरम (प्रवेश द्वार टावर) भी मौजूद बा।
धार्मिक महत्व
[संपादन करीं]विशालाक्षी (संस्कृत से, मने कि "बड़-बड़ आँखि वाली") पार्वती के एगो विशेष उपनाम (विशेषण) हवे। शिव पुराण के अनुसार, जब शिव पहिला बेर पार्वती के देखलें, तब उनका के विशालाक्षी कहल गइल रहे। अन्न (अनाज) आ पोषण के देवी अन्नपूर्णा, जे पार्वती के एगो रूप बाड़ी, उनका खातिर भी विशालाक्षी उपनाँव के इस्तेमाल होला। बनारस में स्थित अन्नपूर्णा मंदिर इनकर सभसे प्रसिद्ध मंदिर मानल जाला, जहाँ ऊ नगर के अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजल जाली। स्कंद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, एक बेर ऋषि व्यास बनारस के लोगन द्वारा भोजन ना दिहला पर नगर के श्राप दे दिहलें। आखिर में विशालाक्षी एगो गृहिणी के रूप में प्रकट भइली आ व्यास के भोजन प्रदान कइली। एह कथा में विशालाक्षी के भूमिका अन्नपूर्णा से मिलत-जुलत बा, काहे कि पुराण में बर्णित कथा में अन्नपूर्णा भी अपना पति शिव के भोजन करावेली आ उनकर भूख मिटावेली। अन्नपूर्णा के भोजन से प्रसन्न होके शिव बनारस के स्थापना कइलें आ उनका के नगर के अधिष्ठात्री देवी नियुक्त कइलें। मानल जाला कि शुरुआती समय में बनारस के विशालाक्षी देवी के अन्नपूर्णा से एकरूप मानल जात रहे, बाकिर बाद में विशालाक्षी के अलग देवी के रूप में पहचान मिल गइल, जवना के कारण दुनो देवी के अलग-अलग मंदिर विकसित भइल।
स्कन्द पुराण के काशी खंड में वर्णन बा कि विशालाक्षी, विश्वनाथ (काशी विश्वनाथ) के साथ कुबेर के वरदान देवे खातिर प्रकट होली। काशी खंड के दोसर अध्यायन में भी देवी विशालाक्षी के महिमा के वर्णन मिलेला। बनारस के पवित्र धार्मिक भूगोल में छः स्थानन के षडंग (छह अंग वाला) योग के प्रतीक मानल जाला। एह आध्यात्मिक यात्रा में छह गो प्रमुख तीर्थस्थान के दर्शन कइल जाला। ई स्थान बाड़ें—काशी विश्वनाथ मंदिर, विशालाक्षी मंदिर, गंगा नदी, काल भैरव मंदिर (जवन बनारस के रक्षक देवता आ विशालाक्षी के भैरव मानल जालें), ढुंढिराज मंदिर (गणेश जी के मंदिर) आ दंडपाणि मंदिर (शिव के एगो रूप के समर्पित)।