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मिथ

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पेंटिंग जेह में एगो मरद आ मेहरारू, आ दू गो लरिका खेलत देखावल गइल बा। साथे सभका साथे एक्हक ठो जानवर। पिकनिक सीन
धार्मिक हिंदू माइथोलॉजी में शिव आ उनुके पूरा परिवार के चित्र। चित्र में शिव के साथे पार्वती, गणेश आ कार्तिकेय अपना-अपना असवारी के साथे देखावल गइल बा लोग आ भाँग के पिसाई हो रहल बाटे। (मंडी शैली पेंटिंग, c.1810-20)

मिथ (अंग्रेजी: myth) भा मिथक लोकसाहित्य (फोकलोर) के एगो प्रमुख विधा हवे, जे मुख्य रूप से अइसन कथा सभ से मिलके बनल होले जिनकर कवनो समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक भा सामाजिक जीवन में मौलिक महत्व होला। विद्वान लोग के अनुसार मिथ के अर्थ, अंग्रेजी में रोजाना के भाषा में इस्तेमाल होखे वाला "मिथ" (यानी अइसन बिस्वास जे सत्य ना होखे) से बिल्कुल अलगे बा। लोककथा के कवनो रचना मिथ ह कि ना, ई तय करे में ओकर ऐतिहासिक भा तथ्यात्मक सत्यता के कवनो बिसेस महत्व नइखे। मिथ के पहिचान ओकर सामाजिक, सांस्कृतिकधार्मिक भूमिका के आधार पर कइल जाला, ना कि ई देख के कि ऊ कथा साँच बा कि झूठ।[1]

इहो देखल जाय

[संपादन करीं]
  1. Deretic, Irina. "Why are myths true: Plato on the veracity of myths." Vestnik of Saint Petersburg University. Philosophy and Conflict Studies (2020): vol. 36, issue 3, pp. 441–451.