महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र
| महिषासुरमर्दिनीस्तोत्रम् | |
|---|---|
| जानकारी | |
| धरम | हिंदू धर्म |
| लेखक | आदि शंकर |
| भाषा | संस्कृत |
| छंद | 21 |
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र (संस्कृत: महिषासुरमर्दिनीस्तोत्रम्, romanized: Mahiṣāsuramardinīstotraṃ) एगो हिंदू स्तोत्र हवे। एकरा में कुल 21 श्लोक बा,[1] जे महादेवी के मुख्य रूप दुर्गा जी के गुणगान करे ला आ महिषासुर नामक असुर के वध करे के चलते उनकर महिमा गावे ला।[2][3]
बिबरन
[संपादन करीं]महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र के रचायिया के रूप में धर्मशास्त्री आदि शंकराचार्य के मानल जाला। ई स्तोत्र शिवरहस्य पुराण के पहिलका भाग के 53वां अध्याय में मिले ला। ई भजन देवी महात्म्य में आइल कथा पर आधारित बा, जहाँ दुर्गा माता के महिषासुर, रक्तबीज, चंड-मुंड आदि असुरन के वध करे के कथा सभ के संदर्भ दिहल गइल बा आ ओह लोग के संहार के अलावा देवी के गुणगान कइल गइल बा।
देवी महात्म्य में "महिषासुर वध" कथा के अनुसार, महिषासुर के अधीन असुरन द्वारा देवता सभ के स्वर्ग से लखेद देवे के बाद, त्रिमूर्ति—ब्रह्मा, विष्णु, आ शिव—आपन-आपन शक्ति मिलाके दुर्गा देवी के रूप में प्रकट कइलें। देवता सभ के अस्त्र-शस्त्र आ शक्ति से सुसज्जित दुर्गा महिषासुर से युद्ध कइली। ओह समय महिषासुर अनेके रूप—सिंह, हाथी, भैंस, आ आखिर में मनुष्य—धारण कइलस, बाकिर अंततः दुर्गा माता ओकर वध कइली। एह बिजय के बाद देवता सभ दुर्गा के आदि शक्ति आ वेदन के स्रोत मान के उनकर स्तुति कइलें। देवी प्रसन्न होके सभ देवता के आश्वासन दिहली कि जबो कवनो संकट आई, तब-तब ऊ रक्षा करे खातिर प्रकट होइहें।
संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ Narayan, Jay (2023-04-17). Namaste: An Illustrated Guide to the Hindu Way of Life (अंग्रेजी में). JL Samskritam Publications. p. 156. ISBN 978-1-3999-5295-8.
- ↑ Flueckiger, Joyce Burkhalter (2015-05-06). Everyday Hinduism (अंग्रेजी में). John Wiley & Sons. p. 28. ISBN 978-1-4051-6021-6.
- ↑ Jones, Constance; Ryan, James D. (2006). Encyclopedia of Hinduism (अंग्रेजी में). Infobase Publishing. p. 139. ISBN 978-0-8160-7564-5.