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महायान

विकिपीडिया से
(महायान बौद्ध धर्म से अनुप्रेषित)
तिनि गो बौद्ध संघ के देखवत एगो नक्सा

महायान बौद्ध धर्म के सबसे बड़हन आ प्रमुख संप्रदाय हवे, जबकि एकरा बाद थेरवाद के नंबर आवे ला। ई बौद्ध परंपरा, ग्रंथ, दर्शन आ धार्मिक आचरणन के एगो ब्यापक समूह हवे, जे प्राचीन भारत के अमरावती क्षेत्र में लगभग पहली सदी ईसा पूर्व से विकसित होखे सुरू भइल। महायान बौद्ध धर्म सुरुआती बौद्ध धर्म के मूल ग्रंथ आ शिक्षा सभ के जरूर स्वीकार करेला, बाकी इनहना के संगहीं कई अइसन सिद्धांत आ ग्रंथन के भी मान्यता देला जे थेरवाद बौद्ध धर्म द्वारा मूल बौद्ध शिक्षा के हिस्सा ना मानल जालें। एहमें खास तौर पर महायान सूत्र आ बोधिसत्त्व मार्ग पर जोर देवे वाली शिक्षा शामिल बाड़ी स।

महायान परंपरा में बोधिसत्त्व के आदर्श के बहुते महत्व दिहल जाला। एह आदर्श के अनुसार साधक खाली अपना मुक्ति खातिर ना, बल्कि सभ प्राणिन के कल्याण आ मुक्ति खातिर भी प्रयास करेला। एकरे साथे प्रज्ञापारमिता (पूर्ण ज्ञान भा सर्वोच्च प्रज्ञा) से संबंधित ग्रंथ आ दर्शन भी महायान के महत्वपूर्ण अंग बाड़ें। वज्रयान भा मंत्रयान परंपरा महायान के एगो उपशाखा मानल जाले। एह परंपरा में विभिन्न तांत्रिक साधना-पद्धति आ मंत्रन के उपयोग कइल जाला। वज्रयान के अनुयायी मानेलें कि एह विशेष साधना विधियन के माध्यम से बुद्धत्व (बुद्ध के अवस्था) के प्राप्ति के मार्ग अधिक प्रभावी भा आसान बन सके ला।

महायान शब्द के इस्तमाल बोधिसत्त्व के ओह मार्ग खातिर भी कइल जाला, जवना में साधक सभ प्राणिन के कल्याण खातिर पूर्ण रूप से जागृत बुद्ध बने के प्रयास करेला। एह कारण एकरा के बोधिसत्त्वयान भी कहल जाला। महायान बौद्ध धर्म आमतौर पर ई मानेला कि बोधिसत्त्व मार्ग के अनुसरण करके बुद्धत्व प्राप्त करे के अवसर सभे लोग खातिर उपलब्ध बा। एह परंपरा में अर्हत के अवस्था के अंतिम आ पूर्ण आध्यात्मिक उपलब्धि ना मानल जाला, बल्कि एकरा के बुद्धत्व से नीचे के अवस्था समझल जाला। महायान में अइसन कई बुद्ध आ बोधिसत्त्वन के मान्यता बा जिनहन लोगन के कवनो उल्लेख थेरवाद परंपरा में ना मिले ला। एह में अमिताभ आ वैरोचन प्रमुख बाड़ें लोग। एकरे अलावा, महायान में बुद्धत्व के बारे में कुछ विशिष्ट कॉन्सेप्ट भी डेवेलप भइल, जइसे त्रिकाय (बुद्ध के तीन रूप) आ उपाय (कुशल साधन), जे थेरवाद परंपरा में ना पावल जालें। महायान बौद्ध दर्शन कई विशिष्ट दार्शनिक सिद्धांतन के भी बढ़ावा देला। एहमें माध्यमिक दर्शन के शून्यता (शून्यता सिद्धांत), विज्ञानवाद (जेकरा के "चित्तमात्र" सिद्धांत भी कहल जाला) आ बुद्ध-स्वभाव के शिक्षा प्रमुख बाड़ी स। एह सिद्धांतन के माध्यम से महायान परंपरा वास्तविकता, चेतना आ बुद्धत्व के प्रकृति के व्याख्या करे के प्रयास करे ला।

सुरुआत में महायान भारत में एगो छोटहने धार्मिक आंदोलन भर रहे, बाकी समय के साथ ई भारतीय बौद्ध धर्म के एगो प्रभावशाली धारा बन गइल। महायान से जुड़ल बड़े-बड़े शिक्षण आ अध्ययन केंद्र, जइसे नालंदा महाविहारविक्रमशिला महाविहार, 7वीं से 12वीं सदी के बीच बहुत समृद्ध रहलें। अपना इतिहास के दौरान महायान बौद्ध धर्म दक्खिन एशिया से निकल के पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया आ हिमालयी क्षेत्रन तक ले बिस्तार ले लिहलस। आज चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान, सिंगापुर, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया आ इंडोनेशिया में बौद्ध धर्म के प्रमुख रूप महायाने परंपरा बाटे। काहें कि वज्रयानवो के महायाने के तांत्रिक रूप मानल जाला, एहसे तिब्बत, मंगोलिया, भूटान आ अन्य हिमालयी क्षेत्रन में भी महायान परंपरा के प्रभाव प्रमुख रूप से देखल जाला। एकरे अलावा, नेपाल, मलेशिया, इंडोनेशिया आ एशियाई प्रवासी समुदायन वाला कई क्षेत्रन में भी महायान परंपरा के अनुयायी मिले लें।

साल 2010 के एगो आँकड़ा के हिसाब से, महायान बौद्ध धर्म दुनिया के सबसे बड़ा बौद्ध संप्रदाय रहे। लगभग 53 परसेंट बौद्ध लोग पूर्वी एशियाई महायान परंपरा से जुड़ल रहलें, जबकि 6 परसेंट वज्रयान परंपरा के अनुयायी रहलें। एकरा तुलना में लगभग 36 प्रतिशत बौद्ध थेरवाद परंपरा से संबंधित मिलल।