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मधुराष्टकम्

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मधुराष्टकम् भा मधुराष्टक, संस्कृत भाषा में रचल एगो अष्टक टाइप क स्तोत्र भा वंदना गीत हवे जे हिंदू देवता कृष्ण के बाल रूप के मधुरता क बरनन करे ला। एकर रचयिता हिंदू भक्ति मार्ग के संत वल्लभाचार्य हवें। वल्लभ एगो तेलुगु ब्राह्मण रहलें जे पुष्टिमार्ग के प्रणेता आ एह शाखा के जनता में फइलावे वाला संत रहलन। कथा के मोताबिक जब भगवान कृष्ण खुद वल्लभ के सोझा आ के आधी रात क उनुके दर्शन दिहलन, सावन के अँजोर के एकादशी के, तहिये ऊ कृष्ण के बंदना में ई अष्टक रचलें।

वल्लभ अउरियो कई ठे साहित्यिक रचना सभ के रचयिता मानल जालें जइसे की व्यास सूत्र भाष्य, जैमिनी सूत्र भाष्य, भागवत सुबोधिनी टीका, पुष्टि प्रवाल मर्यादा, आ सिद्धांत रहस्य

वंदना आ भक्ति के ई सोत्र मधुराष्टक पुष्टिमार्ग के बढ़ावे खातिर रचल गइल। पुष्टिमार्ग भगवान कृष्ण के भक्ति में बिना शर्त लीन हो जाये के रास्ता हवे जहाँ भगवान के भक्ति में गीत गावल (कीर्तन), उनके इयाद कइल (स्मरण भा सुमिरन), उनके रूप कल्पित कइल आ निहारल (दरशन) आ उनके खातिर सेवा के भाव राखल (सेवा) एह मार्ग के मुख्य अंग हवें। ई अष्टक गीत भगवान के मधुर रूप के गावल-सुमिरण-सेवा-दरशन के माध्यम से उनुके असली स्वरुप के साक्षात्कार के माध्यम हवे।