भोजन मंत्र
भोजन मंत्र खाना खाए से पहिले पढ़ल जाए वाला एगो मंत्र बा।[1][2] ई प्राचीन भारतीय परंपरा के अनुसार चलत बा।[3] भोजन मंत्र खाली धार्मिक रस्म-रिवाज खातिर ना ह, बल्कि एकर माध्यम से मानसिक एकाग्रता, कृतज्ञता अउर स्वस्थ जीवनशैली बढ़ावल जाला। आजकाल भी कई गो घर, मंदिर अउर धार्मिक कार्यक्रम में खाना खाए से पहिले ई मंत्र पढ़ल जाला।[3]
भोजन मंत्र
[संपादन करीं]ॐ
ॐ बृह्मार्पणं बृह्महर्विबृह्माग्नौ बृह्मणा हुतम्।
बृह्मैव तेन गन्तव्यं बृह्मकर्मसमाधिना॥ (गीता)[4]
ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु। सर्वविःयं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ (कठोपनिषद)[5]
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
भोजन मंत्र के अर्थ
[संपादन करीं]“बृह्मार्पणं बृह्महर्विबृह्माग्नौ बृह्मणा हुतम्।
ब्रह्म खातिर, ब्रह्म रूप अग्नि में, ब्रह्म रूप आहुति के साथ हवन कइल—
“बृह्मैव तेन गन्तव्यं बृह्मकर्मसमाधिना॥”
एह ब्रह्मरूप साधना के फलस्वरूप जे परम फल मिली, उहे ब्रह्मरूप होई।[4]
“ॐ सह नाववतु।”
हमनी एक-दूसरा के सुरक्षा करीं।
“सह नौ भुनक्तु।”
सभ भोजन सामग्री हमनी मिल के खाइ।
“सर्वविःयं करवावहै।”
हमनी मिल के बड़ पराक्रम करीं।
“तेजस्विनावधीतमस्तु।”
हमार अध्ययन अउर ज्ञान तेजस्वी होखे।
“मा विद्विषावहै।”
हमनी आपस के वैर छोड़ दीं।
“॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥”
सभ तरह के शांति होखे — भौतिक, दैविक अउर आध्यात्मिक।[5]
भोजन मंत्र के उद्देश्य
[संपादन करीं]हमनी के सात्विक (शुद्ध, शांतचित्त) मन से भोजन करे के चाहीं। हमरा पूर्वज लोग भोजन से पहिले ईश्वर के भोजन अर्पित करे के सलाह दिहले रहलें। एह तरह ग्रहण कइल भोजन प्रसाद (पवित्र भोजन) बन जाला। प्रार्थना से पात्र के सफाई, भोजन सामग्री के स्वच्छता अउर पकावे के प्रक्रिया में स्वच्छता सुनिश्चित होखेला, एह से भोजन तीन तरह के अशुद्धि से मुक्त हो जाला। भोजन के शुद्ध करे जरूरी बा, काहे कि शुद्ध भोजन शुद्ध मन बनाए में मदद करे ला।[3]
ईश्वर के अर्पित भोजन पाचन तंत्र में 'वैष्णव' के माध्यम से पचावल जाला। काहे कि ईश्वर वैष्णव के रूप में अग्नि में मौजूद बा, एह से ऊ अशुद्धि समेत भोजन के भी पचा लेला। एह से, भोजन में अशुद्धि होखला परो भी मनुष्य पर कौनो असर ना पड़े।[3]
स्रोत
[संपादन करीं]- ↑ "Bhojan Mantra & Meaning". Arya Samaj Greater Houston. Retrieved 27 August 2025.
- ↑ "Bhojan Mantra". Hindu Swayamsevak Sangh E.V. (Germany). Archived from the original on 20 July 2025. Retrieved 27 August 2025.
- ↑ 3.0 3.1 3.2 3.3 "Brahmarpanam: The Food Prayer". Satya Sai Organisation. Retrieved 27 August 2025.
- ↑ 4.0 4.1 "Bhagavad Gita 4.24". Bhagavad Gita. Retrieved 27 August 2025.
- ↑ 5.0 5.1 "Katha Upanishad Shanti Mantra: 'Om saha nāvavatu…'". Shlokam.org. Retrieved 27 August 2025.