भारत के पर्यावरण
भारत के पर्यावरण दुनिया के सबसे जादे जैव-विविधता (बायोडाइवर्सिटी) वाला इकोज़ोन में से कुछ के शामिल करेला। दक्कन ट्रैप्स, गंगा मैदान आ हिमालय एह देस के मुख्य भौगोलिक विशेषता बाड़ें। देस के सबसे बड़ पर्यावरणीय समस्या अलग-अलग किसिम के प्रदूषण बाटे, आ एगो विकासशील देस होखे के कारण ई जलवायु बदलाव के असर से जादे प्रभावित होखे के रिस्क वाला देस बाटे।[1] भारत में पर्यावरण के बचावे खातिर कानून बनल बाड़ें, आ ई ओह देसन में से एगो हवे जे जैव विविधता संधि (CBD) पर दस्खत कइले बा।[2] पर्यावरण, वन आ जलवायु परिवर्तन मंत्रालय आ हर राज्य के वन विभाग मिल के पूरा देस में पर्यावरण नीति बनावे आ लागू करे के काम करे लें।
प्रमुख तत्व
[संपादन करीं]जिया-जंतु
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भारत में दुनिया के सबसे बेसी जैवविविधता (बायोडाइवर्सिटी) वाला कई तरह के इकोज़ोन मिलेला—जइसे रेगिस्तान, ऊँच पहाड़, पठार, उष्णकटिबंधीय आ समशीतोष्ण जंगल, दलदली इलाका, मैदान, घास के मैदान, नदी किनारे के क्षेत्र, आ द्वीपन के समूह (आर्किपेलगो)। भारत में तीन गो प्रमुख बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉटवो बा—पश्चिमी घाट, हिमालय, आ इंडो-बर्मा क्षेत्र। एह हॉटस्पॉट सभ में बहुत सारा अइसन जिया-जंतु आ पेड़-पौधा मिलेला, जे खाली एही जगहन पर पावल जालन — मने कि एहिजा के घरेलू (एंडेमिक प्रजाति) हवें।
2021 में, देस में करीबन 7,13,789 वर्ग किलोमीटर जमीन जंगल के अंतर्गत रहल, आ ओकरा में से करीब 92 प्रतिशत सरकार के नियंत्रण में रहल। हालाँकि, अभिनो कुल जमीन के सिरिफ 22.7 प्रतिशत हिस्सा जंगल से ढँकल पावल गइल, जबकि राष्ट्रीय वन नीति (1952) के अनुसार ई हिस्सा 33 प्रतिशत होखे के चाहीं। बन भा जंगल के ज्यादातर हिस्सा चौड़ा पत्ता वाला पतझड़ी पेड़ वाला बा, एहू में लगभग छठवाँ हिस्सा साल आ एक-दसवाँ हिस्सा सागौन के बाटे। शंकुधारी (कोणीय भा कोनिफेरस) पेड़ मुख्य रूप से उत्तर के ऊँच इलाका में मिलेलें - इनहन में पाइन, जुनिपर आ देवदार मुख्य बाड़ें।
भारत में करीब 350 प्रकार के स्तनधारी (मैमल), 375 सरीसृप (रेप्टाइल), 130 उभयचर (एम्फीबियन), 20,000 कीट (इन्सेक्ट), 19,000 मछरी आ 1200 प्रकार के चिरई सभ के प्रजाति मिले लीं। एशियाई शेर, बंगाल बाघ आ तेंदुआ प्रमुख शिकारी जानवर बाड़ें; बिल्ली जाति के प्रजातियन के संख्या भारत में दुनिया में सबसे जादे बाटे। एहिजा हाथी, भारतीय गैंडा आ आठ किसिम के हिरन'वो मिले लें।
भारत में 17,000 से जादे फूलदार पौधा के प्रजाति बा, जवन दुनिया के कुल पौधा प्रजातियन के लगभग 6 प्रतिशत ठहरे ला। भारत में दुनिया के लगभग 7 प्रतिशत बनस्पति पावल जाले। अलग-अलग तरह के जलवायु के कारण एहिजा वनस्पति के बहुत समृद्ध विविधता मिलेला। भारत में कुल मिलाके 45,000 से जादे वनस्पति प्रजाति पावल जालीं, जेमें से बहुत अइसन बा जे खाली एहिजा के घरेलू (एंडेमिक) बाड़ी स। भारत के वनस्पति के आधार पर आठ गो मुख्य क्षेत्रन में बाँटल गइल बा: उत्तर-पच्छिमी हिमालय, पूर्वी हिमालय, असम, सिंधु मैदान, गंगा मैदान, दक्कन, मालाबार आ अंडमान।
भूगोल
[संपादन करीं]प्लेट टैक्टॉनिक्स के हिसाब से भारत इंडियन प्लेट पर स्थित बा, जे इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के उत्तरी हिस्सा हवे, आ एकर महाद्वीपीय क्रस्ट भारतीय उपमहाद्वीप बनावेला। ई देस भूमध्य रेखा (equator) के उत्तर में स्थित बा, आ 8°4' से 37°6' उत्तर अक्षांश आ 68°7' से 97°25' पूरुब देशांतर के बीच पड़ेला। भारत दुनिया के सातवाँ सबसे बड़ा देस हवे, जेकर कुल क्षेत्रफल लगभग 3,287,263 वर्ग किलोमीटर बा। ई देस उत्तर से दक्षिण तक करीब 3,214 किमी आ पूरब से पच्छिम तक लगभग 2,933 किमी तक फइलल बा। भारत के जमीनी सीमा लगभग 15,200 किमी लमहर बा, आ समुंद्री तटरेखा (कोस्टलाइन) करीब 7,517 किमी बा।

चार गो प्रमुख प्रमाण के आधारन पर अइसन मानल जाला कि इंडियन प्लेट आ यूरेशियन प्लेट के टक्कर लगभग 40 से 60 मिलियन (4 से 6 करोड़) साल पहिले भइल। एहमें से एगो प्रमाण ई बा कि करीब 50 मिलियन साल पहिले भारत में स्तनधारी (मैमल) जीव सभ के जीवाश्म के रिकॉर्ड ना मिलेला। अपना रास्ता में इंडियन प्लेट रियूनियन हॉटस्पॉट के ऊपर से गुजरल, जवना से ज्वालामुखी गतिविधि भइल आ एहसे दक्कन ट्रैप्स के निर्माण भइल। यूरेशियन प्लेट से टक्कर के कारण हिमालय के उठान भइल, आ लगातार चलत टेक्टोनिक गतिविधि के चलते ई इलाका आजो भूडोल के दृष्टि से संवेदनशील बा। गंगा मैदान के निर्माण गंगा नदी आ ओकर सहायक नदियन द्वारा जमा कइल गइल गाद से भइल, जवन हिमालय आ विंध्य पर्वतमाला के बीच के क्षेत्र में जमल। भारत के चट्टान सभ के अलग-अलग जियोलॉजी वाला काल में बाँटल जा सकेला, जइसे—आर्कियन, प्रोटेरोजोइक (धारवाड़ सिस्टम), कडपा सिस्टम, बिंध्य सिस्टम, गोंडवाना सिस्टम, दक्कन ट्रैप्स, तर्शियरी, प्लीस्टोसीन, आ सभसे अंत में बनल हाल के चट्टान सभ।
भारत के जलवायु बहुत बड़हन भूगोलीय क्षेत्र आ अलग-अलग थलरूप (टोपोग्राफी) के कारण तरह-तरह के मौसम के हालात के शामिल करेला, एहसे एकर बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालल आसान ना बाटे। हिमालय, अरब सागर, बंगाल के खाड़ी आ हिंद महासागर के मौजूदगी के चलते तापमान आ वर्षा के वितरण में बहुत अंतर मिलेला। कोपेन सिस्टम के आधार पर—जहाँ मासिक औसत तापमान, मासिक औसत वर्षा आ वार्षिक वर्षा के ध्यान में रखल जाला—भारत में छह गो मुख्य जलवायु प्रकार मिलेला। एहमें पच्छिम में सूखा रेगिस्तान से लेके उत्तर में हिमानी (ग्लेशियर) आ अल्पाइन टुंड्रा, आ दक्षिण-पच्छिम आ द्वीपीय इलाका में नम उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (बरखाबन) तक शामिल बा। कई इलाका में बहुत अलग-अलग किसिम के माइक्रोक्लाइमेट सभ भी मिले लीं। भारतीय मौसम विभाग साल के चार गो मौसम में बाँटेला: सर्दी (मध्य दिसंबर से मध्य मार्च), गर्मी (मध्य मार्च से मई), बरसात (जून से सितंबर), लौटत मानसून (अक्टूबर से मध्य दिसंबर)।
संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ Wang, Guiling; Schimel, David (2003). "Climate Change, Climate Modes, and Climate Impacts". Annual Review of Environment and Resources (अंग्रेजी में). 28 (1): 1–28. doi:10.1146/annurev.energy.28.050302.105444. ISSN 1543-5938.
- ↑ Cbd, Secretariat To The (2014-02-25). Handbook of the Convention on Biological Diversity (अंग्रेजी में). Routledge. ISBN 978-1-134-20190-7.
- ↑ Sharma, B. K.; Kulshreshtha, Seema; Rahmani, Asad R. (2013-09-14). Faunal Heritage of Rajasthan, India: General Background and Ecology of Vertebrates (अंग्रेजी में). Springer Science & Business Media. ISBN 978-1-4614-0800-0.
- ↑ Rowley DB (1996). "Age of initiation of collision between India and Asia: A review of stratigraphic data" (PDF). Earth and Planetary Science Letters. 145 (1): 1–13. Bibcode:1996E&PSL.145....1R. doi:10.1016/s0012-821x(96)00201-4. Archived from the original (PDF) on 28 December 2006. Retrieved 2007-03-31.
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