भारतीय राष्ट्रीय पंचांग
भारतीय राष्ट्रीय पंचांग, जेकरा के शक पंचांग भा शक कैलेंडर कहल जाला, एगो सौर पंचांग (सुरुज आधारित कलेंडर) ह। भारत में ई ग्रेगोरियन पंचांग के साथे-साथ सरकारी कलेंडर के रूप में इस्तमाल कइल जाला। एकर उपयोग भारत के राजपत्र (द गजट ऑफ इंडिया), आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के समाचार प्रसारण, आ भारत सरकार द्वारा जारी सरकारी पंचांग आ ऑफिशियल कम्युनिकेशन में कइल जाला।[1]
1957 में पंचांग सुधार समिति के सिफारिश पर एह पंचांग के आधिकारिक रूप से अपनावल गइल। शक संवत आमतौर पर ग्रेगोरियन पंचांग से 78 बरिस पीछे चलेला। हालाँकि, जनवरी से मार्च के बीच ई अंतर 79 बरिस के हो जाला।
इतिहास
[संपादन करीं]भारतीय राष्ट्रीय पंचांग के सुधार में वरिष्ठ भारतीय खगोलभौतिकीविद (एस्ट्रोफिजिसिस्ट) मेघनाद साहा के सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहल। ऊ वैज्ञानिक आ औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के संरक्षण में बनल पंचांग सुधार समिति के अध्यक्ष रहलें। उनहीं के कोसिस से 1952 में एह समिति के गठन भइल।समिति के मुख्य काम अइसन सटीक पंचांग तैयार कइल रहे, जे बैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित होखे आ पूरा भारत में एके समान रूप से अपनावल जा सके। एह काम खातिर समिति के देश के अलग-अलग इलाकन में प्रचलित 30 गो अलग-अलग पंचांग के गहराई से अध्ययन करे के पड़ल। ई काम अउरी कठिन एह कारण हो गइल कि एह पंचांगन के धर्म आ स्थानीय परंपरा से भी गहिर संबंध रहे।
1954 में समिति सिफारिश कइलस कि देश भर में नागरिक उपयोग खातिर एगो नियत उष्णकटिबंधीय सौर पंचांग (Fixed Tropical Solar Calendar) के राष्ट्रीय पंचांग के रूप में अपनावल जाए। एकरा साथे धार्मिक काम खातिर एगो उष्णकटिबंधीय चांद्र-सौर पंचांग के भी प्रस्ताव रखल गइल, बाकिर एह सिफारिश के स्वीकार ना कइल गइल।
1955 में प्रकाशित समिति के रिपोर्ट के भूमिका में भारत के पहिलका प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू लिखलें:
"देश में प्रचलित अलग-अलग पंचांग अतीत के राजनीतिक बँटवारा के प्रतीक बाड़ें। अब जबकि भारत स्वतंत्र हो गइल बा, त नागरिक, सामाजिक आ दोसर काम खातिर एगो समान पंचांग होखल जरूरी बा, आ एह समस्या के समाधान वैज्ञानिक तरीका से कइल जाए।"
भारतीय राष्ट्रीय पंचांग के आधिकारिक इस्तेमाल शक संवत 1879 के 1 चैत्र, मने की 22 मार्च 1957 से शुरू भइल। हालाँकि, सरकार द्वारा राष्ट्रीय पंचांग के प्रचार-प्रसार के प्रयास कइला के बावजूद, एकरा के ना त पंचांग बनावे वाला लोग व्यापक रूप से अपनवलस आ ना आम जनता में एह के खास स्वीकृति मिलल। आजुओ एकर इस्तेमाल मुख्य रूप से सरकारी कार्यालयन तक सीमित बा। एकरे साथ-साथ शक संवत पर आधारित पुरनको कई ठे पंचांग चलन में बाड़ें, जवना से कई बेर भ्रम के स्थिति पैदा हो जाले।
संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ "National calendar". National identity elements. Know India: National portal of India. Retrieved 2024-11-27.
बाहरी कड़ी
[संपादन करीं]- भारतीय कैलेंडर की विकास यात्रा - लेखक: गुणाकर मुले। (in हिंदी)
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