भक्ति आंदोलन

भक्ति आंदोलन मध्यकालीन हिंदू धर्म के एगो महत्त्वपूर्ण धार्मिक आंदोलन रहे,[2] जेकर मकसद भक्ति के माध्यम से मोक्ष (मुक्ती) प्राप्ति के मार्ग अपना के[3] समाज के सभ वर्गन तक धार्मिक सुधार पहुँचावल रहे। एह आंदोलन के शुरुआत 6वीं सदी ईस्वी में[4][5] तमिलकम (प्राचीन तमिल क्षेत्र) में भइल मानल जाला। दक्खिन भारत में शुरुआती मध्यकाल के दौरान वैष्णव आलवार आ शैव नायनार संत लोग के भक्ति-प्रधान कविता आ उपदेशन के माध्यम से एह आंदोलन के बिसेस पहिचान मिलल।[2] बाद में ई आंदोलन धीरे-धीरे उत्तर दिशा में फइलल आ भारत के बाकी अलग-अलग क्षेत्रन तक पहुँच गइल। 15वीं सदी के बाद भक्ति आंदोलन पूरबी आ उत्तरी भारत में तेजी से फइलल आ 15वीं से 17वीं सदी ईस्वी के बीच अपना चरम पर पहुँच गइल। ई आंदोलन धार्मिक आ सामाजिक जीवन पर गम्हीर प्रभाव डललस आ भक्ति के व्यक्तिगत आ सहज मार्ग के लोकप्रिय बनवलस।[6]
भक्ति आंदोलन भारतीय उपमहादीप के अलग-अलग क्षेत्रन में अलग-अलग हिंदू देवी-देवतन के केंद्र में रख के बिकसित भइल। एह आंदोलन के कुछ प्रमुख धारा सभ में वैष्णव मत (विष्णु के उपासना), शैव मत (शिव के उपासना), शाक्त मत (शक्ति देवी के उपासना) आ स्मार्त परंपरा शामिल रहल।[7][8][9][10] भक्ति आंदोलन के संत आ प्रचारक लोग अपना उपदेश आ रचना सभ खातिर लोकल भाषा-बोली सभ के इस्तेमाल कइल लोग, जवना से कि ओह लोगन के संदेश आम जनता तक आसानी से पहुँच सके। एह आंदोलन के प्रेरणा अनेक कवि-संतन से मिलल, जिनकर विचारधारा बहुत विविध किसिम के रहल। एहमें द्वैत दर्शन के ईश्वरवादी मत से लेके अद्वैत वेदांत के पूर्ण अद्वैतवादी दर्शन तक के विचार शामिल रहल।[11][12] ई सगरी संत लोग भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग बतावल लोग।
परंपरागत रूप से भक्ति आंदोलन के हिंदू धर्म के एगो प्रभावशाली सामाजिक सुधार आंदोलन मानल गइल बा, काहें से कि ई जनम, जाति भा लिंग से ऊपर उठ के हर ब्यक्ती खातिर आध्यात्मिकता के आपन निजी मार्ग उपलब्ध करावे ला।[6] हालाँकि, कुछ आधुनिक बिद्वान लोग एह बात पर सवाल उठावेलन कि भक्ति आंदोलन वास्तव में सामाजिक सुधार भा विद्रोह के रूप में उभरल रहे कि ना। एह लोगन के हिसाब से, भक्ति आंदोलन के प्राचीन वैदिक परंपरा के दुबारा जिंदा होखे (रिवाइवल), पुनर्व्याख्या (रिवार्किंग) आ नया सामाजिक संदर्भ में पुनर्स्थापन (रीकॉन्टेक्स्चुअलाइजेशन) के रूप में समझल-मानल जा सकेला।[13]
इतिहास
[संपादन करीं]प्रमुख लोग
[संपादन करीं]भक्ति आंदोलन के दौरान क्षेत्रीय भाषा सभ में हिंदू साहित्य के उल्लेखजोग विकास भइल, खासकर भक्ति कविता आ भजन-संगीत के रूप में। एह साहित्यिक परंपरा में आलवार आ नायनार संतन के रचना, आंडाल, बसव, भक्त पीपा, अल्लम प्रभु, अक्का महादेवी, वल्लभाचार्य, विट्ठलनाथ (गुसाईंजी), कबीर, गुरु नानक, तुलसीदास, नाभादास, घनानंद, रामानंद, रैदास, श्रीपादराज, व्यासतीर्थ, पुरंदर दास, कनकदास, विजय दास, वृंदावन के षट् गोस्वामी, रसखान, जयदेव, नामदेव, एकनाथ, तुकाराम, मीराबाई, रामप्रसाद सेन, शंकरदेव, नरसिंह मेहता, गंगासती आ चैतन्य महाप्रभु जइसन संतन के उपदेश आ रचना शामिल बाड़ी स।
आसाम में शंकरदेव के रचना में क्षेत्रीय भाषा पर विशेष जोर दिहल गइल, हालाँकि, एकरे बावजूद ब्रजावली नाँव के एगो आर्टिफिशियल साहित्यिक भाषा के विकास भइल। ब्रजावली मध्यकालीन मैथिली आ असमिया के मिलजुल रूप रहे। ई भाषा स्थानीय लोग खातिर आसानी से समझे लायक रहे, जे भक्ति आंदोलन के समावेशी भावना के अनुरूप रहे, जबकि एकरे चलते रचना सभ के साहित्यिक गरिमा भी बरकरार रहल। ठीक एही तरीका से, एगो अउरी आर्टिफिशियल साहित्यिक भाषा ब्रजबुली के लोकप्रिय बनावे के श्रेय विद्यापति के दिहल जाला। बाद में मध्यकाल में ओड़िशा के कई लेखक आ बंगाल के पुनर्जागरण काल के साहित्यकार लोग भी ब्रजबुली के अपनवलें। एह प्रकार भक्ति आंदोलन खाली धार्मिक चेतना के प्रसार तक सीमित ना रहल, बल्कि क्षेत्रीय भाषा, साहित्य आ सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के विकास में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिहलस।
7वीं से 10वीं सदी के बीच के कुछ शुरुआती लेखक आ संत, जिनकर रचना बाद के कवि-संत आधारित भक्ति आंदोलन पर गहिर प्रभाव डाललस, ओहमें संबंदर, तिरुनावुक्करसर, सुंदरर, नम्मालवार, आदि शंकराचार्य, मणिक्कवाचकर आ नाथमुनि के नाम प्रमुख बा। एह लोग के उपदेश आ रचना दक्षिण भारत में भक्ति परंपरा के मजबूत आधार प्रदान कइलस। आगे चल के 11वीं आ 12वीं सदी में कई गो विद्वान संत लोग वेदांत परंपरा के भीतरें अलग-अलग दार्शनिक मत विकसित कइलें, जिनहन के मध्यकालीन भक्ति परंपरा पर बहुत प्रभाव पड़ल। एह विद्वानन में रामानुज, मध्वाचार्य, वल्लभाचार्य आ निंबार्क प्रमुख रहलें। एह लोग के विचारधारा ईश्वरवादी द्वैतवाद, विशिष्ट अद्वैत आ पूर्ण अद्वैत जइसन अलग-अलग दार्शनिक दृष्टिकोणन के प्रतिनिधित्व करे ला।
भक्ति आंदोलन के दौरान कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथन के विभिन्न भारतीय भाषा सभ में अनुबादो भइल। उदाहरण खातिर, आदि शंकराचार्य द्वारा संस्कृत में रचल सौंदर्य लहरी के 12वीं सदी में विरै कविराज पंडितर तमिल में अनुबाद कइलें, जेकर नाम अभिरामी पाडल रखल गइल। एही तरह, वाल्मीकि के संस्कृत में लिखल रामायण के पहिलका इंडो-आर्य भाषा में अनुबाद माधव कंदली द्वारा असमिया भाषा में कइल गइल, जे सप्तकांड रामायण के नाम से प्रसिद्ध बा।
शांडिल्य आ नारद के रचल बतावल जाये वाला दू गो प्रसिद्ध भक्ति ग्रंथ — शांडिल्य भक्ति सूत्र आ नारद भक्ति सूत्र — भक्ति साहित्य के महत्त्वपूर्ण रचना मानल जालीं। हालाँकि, आधुनिक विद्वान लोग एह ग्रंथन के रचना काल लगभग 12वीं सदी के मानेलें।
इहो देखल जाय
[संपादन करीं]टीका-टिप्पणी
[संपादन करीं]फुटनोट आ संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ SM Pandey (1965). "Mīrābāī and Her Contributions to the Bhakti Movement". History of Religions. 5 (1): 54–73. doi:10.1086/462514. JSTOR 1061803. S2CID 162398500.
- 1 2 Schomer & McLeod (1987), p. 1.
- ↑ India Today Web Desk New (January 24, 2019). "CBSE Class 12 History #CrashCourse: Bhakti movement's emergence and influence". India Today.
- ↑ Hawley 2015, p. 87.
- ↑ Padmaja, T. (2002). Temples of Kr̥ṣṇa in South India: History, Art, and Traditions in Tamil nāḍu (अंग्रेजी में). Abhinav. ISBN 978-81-7017-398-4.
- 1 2 Schomer & McLeod (1987), pp. 1–2.
- ↑ Nelson, Lance (2007). Espín, Orlando O.; Nickoloff, James B. (eds.). An Introductory Dictionary of Theology and Religious Studies. Liturgical Press. pp. 562–563. ISBN 978-0814658567.
- ↑ Kumar, S. S. (2010). Bhakti – the Yoga of Love. Münster: LIT. pp. 35–36. ISBN 978-3643501301.
- ↑ Doniger, Wendy (2009). "Bhakti". Encyclopædia Britannica.
- ↑ Johar, Surinder (1999). Guru Gobind Singh: A Multi-faceted Personality. MD Publications. p. 89. ISBN 978-8-175-33093-1.
- ↑ Schomer & McLeod (1987), p. 2.
- ↑ Christian Novetzke (2007). "Bhakti and Its Public". International Journal of Hindu Studies. 11 (3): 255–272. doi:10.1007/s11407-008-9049-9. JSTOR 25691067. S2CID 144065168.
- ↑ Pechilis Prentiss (2014), pp. 15–16.
किताबी स्रोत आ ग्रंथ सूची
[संपादन करीं]बाहरी कड़ी
[संपादन करीं]| विकिमीडिया कॉमंस पर संबंधित मीडिया Bhakti movement पर मौजूद बा। |
| विकिकहनाम पर कोटेशन देखल जाय: Bhakti movement पर। |
- Bhakti bibliography Archived 4 मार्च 2016 at the Wayback Machine, Harvard University Archive (2001)
- Definition of Bhakti, Swami Vivekananda, Wikisource
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