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भक्ति

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कृष्ण भक्ती आंदोलन के मुख्य हिस्सा रहल बाड़ें। इनके एगो प्रमुख भक्त मीराबाई रहली (फोटो में देखावल)[1]

भक्ति भा भगति (संस्कृत: भक्तिः, पाली: भत्ति) धर्मिक परंपरा सभ में चलनसार एगो महत्त्वपूर्ण कॉन्सेप्ट हवे, जेकर अर्थ लगाव, अनुराग, समर्पण, बिस्वास, श्रद्धा, पूजा, आस्था भा प्रेम होला। भारतीय धर्मन में भक्ति के मतलब कवनो व्यक्तिगत ईश्वर, जइसे राम, कृष्ण भा देवी, के प्रति प्रेमपूर्ण समर्पण हो सकेला। ई निराकार परम सत्य, जइसे निर्गुण ब्रह्म, भा कवनो प्रबुद्ध व्यक्तित्व, जइसे बुद्ध, बोधिसत्त्व भा गुरु, के प्रति श्रद्धा आ समर्पण के रूप में भी प्रकट हो सकेला।

भक्ति अक्सर भक्त आ उपास्य (जेकर भक्ति कइल जाला) के बीच गहिर भावनात्मक संबंध पर आधारित होला। एह संबंध में प्रेम, विश्वास, समर्पण आ आध्यात्मिक निकटता के विशेष महत्त्व होला। भक्ति करे वाला व्यक्ति के भक्त भा भगत कहल जाला।

इहो देखल जाय

[संपादन करीं]
  1. ↑ SM Pandey (1965). "Mīrābāī and Her Contributions to the Bhakti Movement". History of Religions. 5 (1): 54–73. doi:10.1086/462514. JSTOR 1061803. S2CID 162398500.