प्रयोगकर्ता वार्ता:Abhi6477
बिसय जोड़ींभुगोल भूगोल उ शास्त्र ह जेकरा द्बारा पृथ्वी के ऊपरी स्वरुप आउर ओकरा प्राकृतिक विभाग (जइसे, पहाड़, महादेश, देश, नगर, नदी, समुद्र, झील, मरुमध्य, उपत्यका, अधित्यका, वन आदि) के ज्ञान होखेला । प्राकृतिक विज्ञान के निष्कर्ष के बीच कार्य-कारण संबंध स्थापित करते हुए पृथ्वी तल के विभिन्नता के मानवीय दृष्टिकोण से अध्ययन ही भूगोल (Geography) के सार तत्व ह। पृथ्वी के सतह पर जवन स्थान विशेष बा ओकर समता आउर विषमता के कारण, अउरी ओकर स्पष्टीकरण भूगोल के निजी क्षेत्र ह। भूगोल शब्द दु गो शब्द भू यानि पृथ्वी आउर गोल से मिलके बनल बा। विद्बान लोग भूगोल के तीन गो मुख्य विभाग कइले बा- गणितीय भूगोल, भौतिक भूगोल आउर राजनैतिक भूगोल।पहिलका विभाग में पृथ्वी के सौर जगत के अन्यान्य ग्रह आउर उपग्रह आदि के संबंध बतलावल जाला आउर ओ सबके साथ ओकर सापेक्षिक संबंध के वर्णन होला । ए विभाग के बहुत कुछ संबंध गणित ज्योतिष से भी बाटे । दोसरा विभाग में पृथ्वी के भौतिक रूप के वर्णन होखेला आउर ओकरा से इ बात जानल जाला कि नदी, पहाड़, देश, नगर आदि काची के कहल जाला आउर अमुक देश, नगर, नदी य़ा पहाड़ आदि काहवा बाटे । आमतौर प भूगोल से एकरा एहि विभाग का अर्थ लिहल जाला । भूगोल के तीसरा विभाग राजनीतिक होला आउर एमें एह बात के विवेचन होला कि राजनीति, शासन, भाषा, जाति आउर सभ्यता आदि के विचार से पृथ्वी केकौन विभाग ह आउर उन बिभाग के विस्तार आउर सीमा आदि का बाटे। भूगोल एक ओर दोसरा शृंखलाबद्ध विज्ञान से प्राप्त ज्ञान के उपयोग ओह सीमा तक करेला जहाँ तक उ घटना औरी विश्लेषण के समीक्षा तथा ओकर संबंध के यथासंभव समुचित समन्वय करे में सहायक होला। दोसरा ओर अन्य विज्ञान से प्राप्त जवना ज्ञान के उपयोग भूगोल करेला, ओकरा मेँ अनेक व्युत्पत्तिक धारणा अउरी निर्धारित वर्गीकरण होखेला। यदि ई धारणा औरी वर्गीकरण भौगोलिक उद्देश्य खातिर उपयोगी नइखे, त भूगोल के निजी व्युत्पत्तिक धारणा आउर वर्गीकरण के प्रणाली विकसित करे का पडेला । अत: भूगोल आदमी के ज्ञान के वृद्धि करे में तीन प्रकार से सहायक बाटे: (क) विज्ञान से प्राप्त तथ्य के विवेचन करके मानवीय वासस्थान के रूप में पृथ्वी के अध्ययन करेला । (ख) दोसरा विज्ञान के द्वारा विकसित धारणा में अंतर्निहित तथ्य के परीक्षा के अवसर देला , काहेकि भूगोल उ धारणा के स्थान विशेष पर प्रयोग कर सकत बा । (ग) इ सार्वजनिक या त निजी नीति के निर्धारण में आपन विशिष्ट पृष्टभूमि प्रदान करेला, जेकरा आधार पर समस्या के सप्ष्टीकरण सुविधाजनक हो जाला । सबसे पहिले प्राचीन यूनान के विद्वान इरैटोस्थनिज़ भूगोल के धरातल के एक विशिष्टविज्ञान के रुप में मान्यता देहलेँ । एकरा बाद हिरोडोटस आउर रोमन विद्वान स्ट्रैबो औरी क्लाडियस टॉलमी भूगोल के सुनिश्चित स्वरुप प्रदान कइल लोग । ए तरह से भूगोल में 'काहवा' 'कइसे 'कब' 'काहे' आउर 'केतना' प्रश्न के उचित वयाख्या कइल जाला ।
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