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पत्तल

विकिपीडिया से
कचनार के पत्ता से बनल आ सूखल पत्तल।

पत्तल, दोना, भा टपरी भारतनेपाल में बिबिध किसिम के पेड़ सभ की पतई के बनल प्लेट, कटोरी होला जे भोजन-नाश्ता के चीज परोसे आ खाये के कामे आवे ला। ई सेखुआ, पलाश, महुआ, बरगद, कचनार नियर पेड़ सभ के पतई से बनावल जाला जेह में कई पतई सभ के बाँस के महीन सींका से एक संघे सी (टांक) दिहल जाला। पूरा फुल साइज के पत्तल बनावे में 6 से 8 गो ले पतई के इस्तेमाल होखे ला। छोट कटोरी नियर बनल चीज दोना आ नेपाल में टपरी कहाला। ई सूखल आ ताजा दुनो किसिम के पतई से बनावल जा सके लें।[1] आमतौर प ई परंपरागत भोज में इस्तेमाल होखे लें, तिहुआर में आ मंदिर में, पूजा-पाठ के प्रसाद खातिर इनहन के इस्तेमाल होखे ला। इनहन के बनावे के उद्योग देहाती हिस्सा में एगो कुटीर उद्योग के रूप में गाँव के लोगन के अर्थबेवस्था के महत्व वाला चीज हवे।

औरो दूसर भाषा सभ में नाँव:

  • Hindi - पत्तल/दोना (Pattal/ Donā)
  • Gujarati - પાંદડું નો થાળી (Pā̃dḍu no Thāḷi)
  • Marathi - पांनाचे थाळी (Pā̃nāche Thāḷi)
  • मणिपुरी - ꯄꯥꯝꯕꯤ ꯄꯨꯈꯝ (Pāmbi Pukham)
  • असमिया - পাতৰ কাহী (Pātôr Kāhi)
  • भाषा - পাতার থালা (Pātār Thālā)
  • उड़िया - ଖଲିପତ୍ର/ଖଲି (Khålipåtrå/ Khåli), ଖଲି ତାଟିଆ/ଦନା (Khåli Tāṭiyā/ Dånā - the semicircular ones)
  • मैथिली - পাতক থাৰী (Pātak Thāri), পাতক বাটী (Pātak Bāṭi - the semicircular ones)
  • नेपाली - टपरा/टपरी (Ṭaparā/ Ṭapari), दुने (Dune - semicircular ones)
  • तेलुगु - ఇస్తారాకుల/విస్తారాకుల/విస్తారా (Istārākul/ Vistārakul/ Vistārā)
  • कन्नड़ - ಎಲೆ ತಟ್ಟೆ (Ele Taṭṭe)
  • तमिल - இலைத் தட்டு (Ilaitû Taṭṭu)
  • मलयालम - ഇല പാത്ര (Ila Pātra)
  • सिंहली - කොළ තහඩුව (Kola Tahaḍruva)

आधुनिक समय में

[संपादन करीं]

भारत आ नेपाल में पत्तल बनावल एगो कुटीर उद्योग (कॉटेज इंडस्ट्री) हवे। पत्तन के पत्ता के बहुत पतला बाँस के सींका से सिय के (टांक के) जोड़ल जाला, आ एगो आदमी दिन भर में करीब 200 पत्तल बना सकेला। अब धीरे-धीरे कई इलाकन में मशीन से पत्तल बनावे के काम भी शुरू हो रहल बा।

केला के पत्ता में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट (पॉलीफेनाल) बीमारी से लड़े में मदद करे के बतावल जाला। पत्तल सबसे जादे पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) सिंगल यूज (एकबार इस्तेमाल होखे वाला) खाना परोसे के तरीका में से एक हवे। अब जर्मनी जइसन देश भी एकर फायदा समझे लागल बाड़ें, आ कुछ कंपनी पत्तल के व्यापारिक रूप में बनावे लागल बाड़ी। भारत में पत्तल लगभग हर जनरल स्टोर के दुकान पर मिल जाला।

टपरी आजकाल शहरन में, जइसे काठमांडू, के फास्ट फूड स्टॉल पर भी इस्तेमाल होखेला। टपरी बनावे में अभ्यास आ कौशल चाहीं।

नेपाल में पत्ता से बनल बर्तन के तीन तरह होखेला—टपरी सबसे बड़ा होखेला, हल्का मुड़ल (curved) आ हरियर सेखुआ (साल) के पत्ता से बनल होखेला। दोना भा दूना एगो कटोरा जइसन होखेला, जवन तरल चीज रखे में आसान होला। बोटा सबसे छोट कटोरी होखेला, जवन खाली एक ठो साल के पत्ता से बनावल जाला।

  1. Chandra, Swati (23 Jan 2012). "Traditional 'pattal' loses out to convenient plastic". Times Of India. Archived from the original on 2014-02-02.