नाथ पंथ
Appearance
लग. 17वीं सदी के नाथ जोगी के एगो पेंटिंग | |
| Founder | |
|---|---|
| मछेंदरनाथ/गोरखनाथ | |
| Regions with significant populations | |
| भारत आ नेपाल | |
| Religions | |
| हिंदू धर्म |
नाथ पंथ चाहे नाथ संप्रदाय (संस्कृत: नाथसम्प्रदायः) भारत[1] आ नेपाल में हिंदू धर्म के शैव परंपरा में एगो उपशाखा हवे। ई मध्यकालीन जमाना में चले वाला एगो आंदोलन रहे, जे बौद्ध, शैव, तंत्र आ योग—एह चारों धारा के सोच आ तरीका के मिलाके आगे बढ़ल।
नाथ लोग आपन समूह में सिवजी के पहिला भगवान या गुरु मानेला, बाकिर ओह लोग के गुरु-सूची जगह–जगह पर अलग मिलेला। एह पूरा परंपरा में नौवीं–दसवीं सदी के गुरु मछेंदरनाथ (मत्स्येन्द्रनाथ) आ विशेष रूप से गोरखनाथ (गोरक्षनाथ) के बिचार, चिंतन आ संगठन बहुत महत्त्वपूर्ण मानल जाला। गोरखनाथ, नाथ पंथ के मूल संस्थापक समझल जालें, जबकि कुछ लोग मछेंदर के एकर संस्थापक माने ला।
इहो देखल जाय
[संपादन करीं]संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ Natha: Indian religious sect, Encyclopedia Britannica (2007)
बाहरी कड़ी
[संपादन करीं]| विकिमीडिया कॉमंस पर संबंधित मीडिया Natha पर मौजूद बा। |
- नाथ पंथ (मोनोग्राम) [मुर्दा कड़ी], डॉ. प्रदीप कुमार राव, महायोगी गुुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ, गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर।
- Nath FAQ
- International Nath Order Archived 28 अगस्त 2008 at the Wayback Machine