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ज्योतिराव फुले

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ज्योतिराव फुले (मराठी: जोतिबा फुले; जनम: 11 अप्रैल 1827 – निधन: 28 नवंबर 1890), जिनका के ज्योतिबा फुले आ आदर के संघे महात्मा फुले के नाँव से भी जानल जाला, महाराष्ट्र के एगो भारतीय समाज सुधारक, व्यवसायी, जाति-व्यवस्था के विरोधी आ लेखक रहलें।[1][2] उनकर काम कई क्षेत्र में फैलल रहल—जइसे छुआछूत आ जाति-प्रथा के खत्म करे, आ औरतन आ दबावल जाति (दलित) के लोग के शिक्षा देवे खातिर।[3] ऊ आ उनकर मेहरारू सावित्रीबाई फुले भारत में महिला शिक्षा के अगुआ मानल जाला लोग।[3][4]

फुले 1848 में पुणे में तात्यासाहेब भिडे के घर (भिडेवाड़ा) में लड़कियन खातिर पहिला स्कूल खोललें।[5] बाद में ऊ अपना अनुयायियन के साथे मिलके सत्यशोधक समाज बनवलें, जवन निचला जाति के लोग खातिर बराबरी के अधिकार दियावे खातिर काम करत रहे। एह संगठन में कवनो धर्म आ जाति के लोग शामिल हो सकत रहल, आ ई दबावल वर्ग के उत्थान आ बेहतरी खातिर काम करत रहे।

  1. "Remembering Jyotirao Phule: The Pioneer Of Girls' Education In India". NDTV.com. Archived from the original on 9 November 2020. Retrieved 2020-12-18.
  2. "Mahatma Jyotirao Phule: Reformer far ahead of his time". Hindustan Times (अंग्रेजी में). 2019-06-27. Archived from the original on 18 December 2020. Retrieved 2020-12-18.
  3. 1 2 "Remembering the pioneer of women's education in India: Contributions by Jyotirao Phule". India Today (अंग्रेजी में). 28 November 2016. Archived from the original on 16 April 2021. Retrieved 2020-12-18.
  4. "Savitribai Phule: The pioneer of women's education in India". The Week (अंग्रेजी में). Archived from the original on 24 June 2021. Retrieved 2020-12-18.
  5. Jill Sperandio (11 December 2018). Pioneering Education for Girls across the Globe: Advocates and Entrepreneurs, 1742-1910. Rowman & Littlefield. p. 35. ISBN 978-1-4985-2488-9.