चक्रवृद्धि ब्याज
संपूर्ण ब्याज (Compound Interest) एक तरह के ब्याज ह, जवना में मूलधन के साथ-साथ पहिले के जमा भइल ब्याज परो ब्याज जोड़ल जाला। एह तरीका से हर ब्याज काल में ब्याज के रकम बढ़ जाला, आ कुल रकम तेजी से बढ़े लागेला। ई विधि आमतौर पर दीर्घकालिक निवेश आ बचत में इस्तेमाल होखेला, जहाँ समय के साथ पूंजी में वृध्दि होखे के संभावना अधिक होला[1]।.
एकरे विपरीत, साधारण ब्याज (Simple Interest) उ तरीका ह, जवना में ब्याज के गणना केवल मूलधन पर कइल जाला, आ ब्याज के रकम में हर अवधि पर कौनों बढ़ोतरी ना होखेला। कुछ विशेष आ सीमित परिस्थिति छोड़ के, व्यावहारिक जीवन के अधिकतर क्षेत्र में चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) के ही अपनावल जाला, चाहे उ लेन-देन होखे भा निवेश।
चक्रवृद्धि ब्याज के गणना
[संपादन करीं]चक्रवृद्धि ब्याज के गणना[2] करे खातिर एक विशेष सूत्र के उपयोग कइल जाला:
जहाँ:
- A = कुल राशि (Total Amount)
- P = मूलधन (Principal)
- r = वार्षिक ब्याज दर (Annual Interest Rate)
- n = साल में ब्याज के जोड़ल जाय वाला संख्या
- t = समय (वर्ष में)
चक्रवृद्धि ब्याज निकाले खातिर कुल राशि (A) में से मूलधन (P) घटा देहल जाला।
उदाहरण:
मनीष 3 साल खातिर ₹10,000 के 8% वार्षिक ब्याज दर पर निवेश करेलन, जहाँ ब्याज साल में एक बेर जोड़ल जाला (n = 1)।
सूत्र:
यहाँ:
P = 10,000
r = 0.08 (8%)
n = 1
t = 3
गणना:
चक्रवृद्धि ब्याज = A - P = ₹12,597 - ₹10,000 = ₹2,597
एह उदाहरण से साफ बा कि चक्रवृद्धि ब्याज में ब्याज परो ब्याज मिलेला, जे समय के साथ जमा के तेजी से बढ़ा देला।