चंद्रधर शर्मा गुलेरी
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चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' (7 जुलाई 1883 — 11 सितंबर 1922) जयपुर, भारत के रहे वाला लेखक आ विद्वान रहलें। ऊ हिंदी, संस्कृत, प्राकृत आ पाली सभ भाषा के गहिरा जानकार रहलें। उनका जनम जयपुर में भइल, बाकिर उनका परिवार असल में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के गुलेर गाँव से रहे।[1] एहसे उनका नाँव के पीछे “गुलेरी” लागल — आपन मूल-स्थान के सम्मान में। उनुका के बहुमुखी प्रतिभा के धनी बतावल जाला। उनका सबसे ज़्यादा उसने कहा था (1915) कहानी खातिर याद कइल जाला, जवन बहस के बावजूद हिंदी के पहिली लघुकथा मानल जाले।[1][2] गुलेरी जयपुर के ऐतिहासिक जंतर मंतर के बचावे, सुरक्षित करे आ संरक्षित रखे में भी बड़ा भूमिका निभवले रहलें।[1]
संदर्भ
[संपादन करीं]- 1 2 3 Singh, Suneet (7 July 2025). "हिंदी जगत के ध्रुव तारा चन्द्रधर शर्मा गुलेरी, जानें कैसे बने साहित्य, संस्कृति और संवेदना के प्रतीक". Times Now Navbharat (Hindi में). Retrieved 19 February 2026.
- ↑ "चंद्रधर शर्मा गुलेरी की 100 साल पुरानी कहानी: उसने कहा था". AajTak (Hindi में). 11 December 2014. Retrieved 19 February 2026.
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