Jump to content

खुमाण रासो

विकिपीडिया से

खुमाण रासो भा खुम्माण रासो हिंदी साहित्य के आदिकाल भा वीरगाथा काल के एगो बहुत महत्वपूर्ण वीरगाथा प्रधान काव्य हवे। एकरा रचनाकार दलपति भा दलपत विजय मानल जालें। एह काब्य में में चित्तौड़ के शासक रावल खुम्माण के वीरता आ उनुका द्वारा लड़ल गइल चौबीस गो युद्धन के जीवंत चित्रण मिलेला। लगभग पाँच हजार छंद वाला एह बड़ प्रबंध काव्य में वीर रस के साथे-साथ श्रृंगार रस के सुंदर मेल देखे के मिलेला। एह में खास तौर पर बगदाद के खलीफा अल-मा'मून के खिलाफ खुमाण के विजय के विस्तार से बर्णन कइल गइल बा।

राजस्थानी मिश्रित सुरुआती हिंदी में लिखल एह रचना में बप्पा रावल से लेके बाद के कई राजन के उल्लेख मिलेला। एह कारण से अलग-अलग विद्वान लोग एह ग्रंथ के मूल रचना-काल पर अलग-अलग मत रखे ला। तब्बो ऐतिहासिक आ साहित्यिक नजरिया से ई कृति ओह दौर के राजपूत संस्कृति आ वीरता के समझे खातिर एगो महत्वपूर्ण आधार मानल जाले। कुछ बिद्वान लोग एकरा के 9वीं सदी के सुरुआती दौर के रचना माने ला[1] हिंदी साहित्य के इतिहासकार रामचंद्र शुक्ल के हिसाब से अंतिम रूप से एह रचना के संकलन 17वीं सदी में भइल हो सके ला।[2] शुकुल जी इहो कहे लें कि ई संदिग्ध बाटे कि दलपत विजय असली मूल खुमाण रासो के रचयिता रहलें कि ओकरा बाद के अंश के।[3]

  1. मिश्र, शीला (2015). सल्तनत कालीन साहित्य इतिहास एवं संस्कृति (Hindi में). नई दिल्ली: वाणी प्रकाशन. ISBN 978-93-5072-729-4. Retrieved 7 मई 2026.
  2. शुक्ल, रामचंद्र (1941). वीरगाथा: हिंदी साहित्य का इतिहास (Hindi में). बनारस: नागरीप्रचारिणी सभा. p. 33.
  3. शर्मा, रामविलास (1 सितंबर 2009). आचार्य रामचंद्र शुक्ल और हिंदी आलोचना (अंग्रेजी में). नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन. ISBN 978-81-267-0572-6. Retrieved 7 मई 2026.