अनुनासिक
अनुनासिक इंडो-आर्यन भाषा सभ में एक किसिम के उच्चारण ह जे मुँह आ नाक दुनों के मदद से होला। ई स्वर आ व्यंजन सभ के मुँह से उच्चारण करत घरी कुछ हद तक नाक से हवा निकले के परिणाम होला। देवनागरी लिपि में ई चंद्रबिंदी के रूप में लिखल जाला। जनरल भाषा बिज्ञान में ई नैसलाइजेशन के समकक्ष हवे। एकरा के अक्सरहा अनुस्वार के साथे कन्फ्यूज कइल जा सके ला काहें की दुनों के उच्चारण मिलत-जुलत होला आ लोकल परभाव भा प्रमाद के चलते इनहन के उच्चारण में आपस में अदला-बदली हो सके ला; कबिता में छंद के सही रखे खातिर; वर्ण के मधुर बनावे खातिर चाहे अउरी कारन से इनहन के अदला-बदली हो सके ला। देवनागरी लिखाई में कई जगह अनुनासिक के चंद्रबिंदी से लिखे की बजाय खाली बिंदी से लिख दिहल जाला,[1] एहू कारन भरम के इस्थिति पैदा हो जाला।
संस्कृत व्याकरण में
[संपादन करीं]पाणिनि के अष्टाध्यायी में एकरा खातिर सूत्र हा - "मुखनासिकावचनोऽनुनासिको"।[2]
संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ Guru 2018.
- ↑ Shaastri, Shastri & Shastri 2009, p. 4.
स्रोत ग्रंथ
[संपादन करीं]- Shaastri, Vishwanaath; Shastri, Parishishtkar; Shastri, Lakshminarayan (2009). Laghusiddhaantkaumudi 'Shrivardaraajpraneeta : 'Paniniya-Vyakaran-Praveshika (Sanskrit में). Motilal Banarsidass Publishe. ISBN 978-81-208-2427-0. Retrieved 2025-06-20.
- Guru, Kamta Prasad (2018-07-27). Hindi Vyakaran: Bestseller Book by Kamta Prasad Guru: Hindi Vyakaran (Hindi में). Prabhat Prakashan. ISBN 978-93-86871-59-6. Retrieved 2025-06-20.