अत्त दीपो भव
अत्त दीपो भव भा अप्प दीपो भव[1] बौद्ध परंपरा में, भगवान् बुद्ध के अंतिम बचन के रूप में कोट कइल जाये वाला सूत्रवाक्य ह। ई तिपिटक में संकलित "महापरिनिब्बाण सुत्त" (महापरिनिर्वाण सूत्र) में आइल बतावल जाला। एकर संस्कृत छाया होखे ला "आत्म दीपो भव" आ अंग्रेजी में ई दू तरीका से अनुबाद कइल जाला - "बी अ लाईट ऑनटू युअरसेल्फ़"[2] चाहे "बी युअर ओन लैम्प"।[3] मोटा-मोटी एकर अनुबाद होखी "आपन दिया खुद बनऽ"।
कुछ बिद्वान एह में दीप शब्द के अरथ टापू वाला दीप के लेला आ एह वाक्य के अरथ एही अनुसार करे ला - "कि आपन दीप (एकाकी, बाकी दुनिया से अलग) खुद बनऽ, अपना खुद के सरन में रहऽ।"
ओशो रजनीश अपना प्रवचन सभ में बेर-बेर बुद्ध के संबंध में एह वाक्य के कोट करे लें। पिपरहवा के अवशेष सभ के भारत वापिस लियावे के बाद जनता के संबोधन में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना भाषन में एह सूत्रवाक्य के कोट कइलन।[4]
ई उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर जिला में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के मोटो हवे।
इहो देखल जाय
[संपादन करीं]संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ ओशो (1 जून 2015). Learning Happiness: The Discipline of Transcendence (अंग्रेजी में). Penguin Books Limited. ISBN 978-93-5214-031-2.
- ↑ Chitkara, M. G. (2002). Kashmir Shaivism: Under Siege (अंग्रेजी में). APH Publishing. p. 84. ISBN 978-81-7648-360-5.
- ↑ The Maha-Bodhi (अंग्रेजी में). Maha Bodhi Society of India. 1892.
- ↑ "भगवान बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ". Press Information Bureau (Hindi में). 20 November 2025. Retrieved 7 May 2026.
बाहरी कड़ी
[संपादन करीं]- Atta Deep Bhav ! : Rethinking Social Work in the light of Ambedkar’s Thought - Mali Devi Sawariya, Aditi Mahavidyalaya, University of Delhi
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