नदिया के पार (१९८२)

भोजपुरी विकिपीडिया से
इहाँ जाईं: नेविगेशन, खोजीं

नदिया के पार भोजपुरी-अवधी की मिलल जुलल हिंदी भाषा में बनल एगो सिनेमा बा। राजश्री बैनर में बनल ए फिलिम में सचिन आ साधना मेन रोल में रहे लोग आ ए फिलिम क डाइरेक्टर हिरेन नाग आ प्रोड्यूसर ताराचंद बड़जात्या रहलें। फिलिम क कहानी उत्तर प्रदेश की गाँव में घटित होत देखावल गइल बा। फिलिम क कहानी केशव प्रसाद मिश्र की हिंदी उपन्यास कोहबर की शर्त की ऊपर आधारित रहे।

रवीन्द्र जैन की मधुर संगीत से सजल ए फिलिम क कई गो गाना बहुत परसिद्ध भइल रहे जइसे कि - कौन दिसा में ले के चला रे बटोहिया..., अउरी साँची कहीं तोहरे आवन से भउजी...

फिलिम में ओ समय की गाँव क परिवेश देखावल गइल बा आ फिलिम क काफी हिस्सा क शूटिंग जौनपुर जिला की सिकरारा में भइल रहे।

फिलिम कई साल लगातार इलाहाबाद में हॉउसफुल चलल। १९९४ में एही फिलिम के फ़िर से बदलाव कइके हम आपके हैं कौन फिलिम बनावल गइल।

कहानी[संपादन]

फिलिम क कहानी हिंदी उपन्यास कोहबर की शर्त पर आधारित रहे।

एगो गाँव में एक ठो किसान बाभन आ उनकर दू गो भतीजा ओंकार (इन्दर ठाकुर) आ चन्दन (सचिन) रहत बा लोग। ओंकार बेमार पड़ जालें आ दुसरा गाँव क एगो बैद जी उनकर इलाज करे लें। इलाज की बाद बैद जी की बड़की लइकी रूपा (मिताली) से ओंकार क बियाह हो जाला। रूपा क जचगी होखे वाला रहेला त उनकर छोट बहिन गुंजा (साधना सिंह) आवेली गुंजा आ चन्दन में प्रेम हो जाला आ ई जान के रूपा उन्हान लोगन क बियाह करावे में मदद करे के कहेली। ई बात खाली रूपा के मालुम रहेला आ उनकर अचानक मौत हो जाला

बैद जी आ ओंकार क चचा लोग ई तय करेला कि ओंकार आ गुंजा क शादी हो जाय। लेकिन बियाह की रसम से ठीक पहिले लोगन के चन्दन आ गुंजा की प्रेम क पता चल जाला आ तब चन्दन आ गुंजा क बियाह हो जाला।