कविता
भोजपुरी विकिपीडिया से
'कविता' नाम के कौनो विकल्प न लौकल हा, एहि से ई नया पन्ना खोलनी हा| भोजपुरी लेखा मीठ बोली मे कविता के जगहा न होखे ई कइसे हो सकेला! सुरुआत करे खातिर मा सारदा के वन्दना कवित्त छन्द मे प्रस्तुत कइ रहल बानी|
" रिसियन के,तपसियन के बिराग, त्याग,
कामिनी के मोहक सरूप के सिन्गार तु
शब्दन मे बहे वाली धार-धार भावना त,
जियरा मे दिया लेखा बरत बिचार तु|
एगो तहरे मे कूल्ही, कूल्ही मे तुही त बाडु,
सृजन तु, पालन तु, सृस्टि के सन्हार तु|
हउ धनुस-बान कबौ, बासुरी के तान कबौ,
जानकी के वन्दना त राधा जी के प्यार तु|"