इतिहास

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इतिहास शब्द के प्रयोग विशेषत: दुई अर्थन में करल जायेला। एक बा प्राचीन अथवा विगत काल के घटनाकु ल आ दूसर उ घटना कुल के विषय में धारणा। इतिहास शब्द (इति + ह + आस ; अस् धातु, लिट् लकार अन्य पुरुष तथा एक वचन) तात्पर्य बा "ई निश्चित रहल"। ग्रीस के लोग इतिहास खातिर "हिस्तरी" (history) शब्द के प्रयोग करत रहले। "हिस्तरी" के शाब्दिक अर्थ "बुनना" रहल। अनुमान अईसन होत बा कि ज्ञात घटनावन के व्यवस्थित ढंग से बुनकर के अईसन चित्र उपस्थित कईल जाव जवन सार्थक आ सुसंबद्ध लगे।

इ प्रकार से इतिहास शब्द के अर्थ बा - परंपरा से प्राप्त उपाख्यान समूह (जैसे कि लोक कथा सब), वीरगाथा (जैसे कि महाभारत) या ऐतिहासिक साक्ष्य।[१] इतिहास के अंतर्गत हमनी के जवन विषय के अध्ययन करेली सब उ में अब तक घटित घटनावन या उ से संबंध रखे वाला घटनावन के कालक्रमानुसार वर्णन होखेला।[२] दूसर शब्दन में मानव के विशिष्ट घटनवन के नाम ह इतिहास।[३] या फिर प्राचीनता से नवीनता के ओर आवे वाला, मानवजाति से संबंधित घटनवन के वर्णन इतिहास ह।[४] इ घटना सब आ ऐतिहासिक साक्ष्यन के तथ्य के आधार पर प्रमाणित करल जायेला।

इतिहास के आधार आ स्रोत[सम्पादन]

इतिहास के मुख्य आधार युगविशेष आ घटनास्थल के उ अवशेष हवे जा जवन कौनौ ना कौनो रूप में प्राप्त होखेला। जीवन के बहुमुखी व्यापकता के कारण स्वल्प सामग्री के सहारे विगत युग अथवा समाज के चित्रनिर्माण करल दु:साध्य बा। सामग्री जेतने अधिक हो जायेला ओही अनुपात से बीतल युग तथा समाज के रूपरेखा प्रस्तुत करल साध्य हो जायेला। पर्याप्त साधनन के होते हुए भी ई नईखे कहल जा सकत बा कि कल्पनामिश्रित चित्र निश्चित रूप से शुद्ध या सत्य ही होखी। एहिसे उपयुक्त कमी के ध्यान रखके कुछ विद्वान् कहेलन जा कि इतिहास के संपूर्णता असाध्य जईसन बा, फिर भी यदि हमनी के अनुभव आ ज्ञान प्रचुर होई त, ऐतिहासिक सामग्री के जाँच-पड़ताल से हमानी के कला तर्कप्रतिष्ठत होखे आ कल्पना संयत आ विकसित होखे त अतीत के हमनी के चित्र अधिक मानवीय आ प्रामाणिक हो सकत बा। सारांश ई बा कि इतिहास के रचना में पर्याप्त सामग्री, वैज्ञानिक ढंग से उ का जाँच, उ से प्राप्त ज्ञान के महत्व बुझे के विवेक के साथ ही साथ ऐतिहासक कल्पना के शक्ति तथा सजीव चित्रण के क्षमता के आवश्यकता बा। याद रखे के चाहिं कि इतिहास ना त साधारण परिभाषा के अनुसार विज्ञान ह आ ना केवल काल्पनिक दर्शन या साहित्यिक रचना ह। इ सबके यथोचित संमिश्रण से इतिहास के स्वरूप रचल जायेला।

इतिहास न्यूनाधिक ओही प्रकार के सत्य ह जईसन विज्ञान आ दर्शनन के होखेला। जवन प्रकार विज्ञान अ दर्शनन में हेरफेर होखेला ओही प्रकार इतिहास के चित्रण में भी होखत रहेला। मनुष्य के बढ़ते हुए ज्ञान आ साधनन के सहायता से इतिहास के चित्रन के संस्कार, ओकर पुरावृत्ति आ संस्कृति होत रहेला। प्रत्येक युग आपन आपन प्रश्न उठावेला आ इतिहास से ओकर समाधान खोजत रहेला। एहिसे प्रत्येक युग, समाज अथवा व्यक्ति इतिहास के दर्शन आपन प्रश्नन के दृष्टिबिंदुवन से करत रहेला। यह ई सब होते हुए भी साधनन के वैज्ञानिक अन्वेषण तथा निरीक्षण, कालक्रम के विचार, परिस्थिति के आवश्यकतन तथा घटनवन के प्रवाह के बारीकी से छानबीन आ उ से परिणाम निकाले में सर्तकता आ संयम के अनिवार्यता अत्यंत आवश्यक बा। उ के बिना ऐतिहासिक कल्पना आ कपोलकल्पना में कोई भेद ना रह जाई।

संदर्भ[सम्पादन]

  1. आप्टे, वामन शिवराम (1969). संस्कृत हिन्दी कोश. दिल्ली, पटना, वाराणसी भारत: मोतीलाल बनारसीदास. p. 174.  Text "editor: वामन शिवराम आप्टे" ignored (help); Unknown parameter |accessday= ignored (help); Unknown parameter |accessyear= ignored (help); Unknown parameter |accessmonth= ignored (help)
  2. प्रसाद, कालिका (2000). बृहत हिन्दी कोश. वाराणसी भारत: ज्ञानमंडल लिमिटेड. p. 147.  Text "editor: राजबल्लभ सहाय, मुकुन्दीलाल श्रीवास्तव" ignored (help); Unknown parameter |accessday= ignored (help); Unknown parameter |accessyear= ignored (help); Unknown parameter |accessmonth= ignored (help)
  3. नाहर, डॉ रतिभानु सिंह (1974). प्राचीन भारत का राजनैतिक एवं सांस्कृतिक इतिहास. इलाहाबाद, भारत: किताबमहल. p. 1.  Text "editor: " ignored (help); Unknown parameter |accessday= ignored (help); Unknown parameter |accessyear= ignored (help); Unknown parameter |accessmonth= ignored (help)
  4. Whitney, W. D. (1889). The Century dictionary; an encyclopedic lexicon of the English language. New York: The Century Co. Page 2842|language=अंग्रेज़ी

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